जानिए क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति?

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बच्चों मकर संक्रांति आने वाली है। इस दिन आप सब के घर खिचड़ी बनती होगी। दान दिया भी जाता होगा। लेकिन इसे मनाने का कारण क्या है.. आज मैं आपको बताऊँगी कि हम लोग मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं। मकर संक्रांति हर साल जनवरी महीने में मनाई जाती है। जैसे छठ पूजा में सूर्य भगवान की पूजा की जाती वैसे ही इस त्योहार में भी सूर्य भगवान की पूजा और दान किया जाता है। बच्चों आपको राशियों के बारे में तो पता ही होगा। राशि 12 तरह की होती हैं। हम सभी की राशियाँ अलग-अलग होती हैं। जैसे मेष, कुम्भ, कन्या और तुला। पूरे 12 महीने में सूर्य 12 राशियों में रहते हैं। यानि हर एक महीने में सूर्य एक राशि में रहते हैं। सूर्य का राशि बदलना ही संक्रांति कहलाता है। इन्ही राशियों में एक राशि होती है मकर राशि। तो बच्चों मकर संक्रांति के दिन सूर्य भगवान धनु राशि से मकर राशि में आते हैं। तो सूर्य की इस संक्रांति को हम लोग मकर संक्रांति के रूप में मनाते हैं। मकर राशि सूर्य भगवान के बेटे शनि की राशि है, और इस दिन सूर्य भगवान अपने बेटे शनि से मिलने उनके घर मकर राशि जाते हैं। इस दिन सभी लोग कुछ न कुछ जरूर दान करते हैं। कहते हैं इस दान करना बहुत शुभ होता है। हमारे पुराणों में भी इस दिन को देवता यानि भगवान का दिन माना जाता है।  पुराणों में कहा गया है कि इस दिन दान करने से उस दान के बदले 100 गुना ज्यादा पुण्य मिलता है। मकर संक्रांति को लेकर एक और बात बोली जाती है, वो ये कि इस दिन से शरद ऋतु यानि ठंड के मौसम में भी बदलाव आने लगते हैं। खिचड़ी के बाद से ठंड कम पड़ने लगती है।

मकर संक्रांति को लेकर एक और मान्यता है वो ये कि माँ गंगा इसी दिन यानि मकर संक्रांति के दिन भागीरथ के पीछे-पीछे चल कर कपिल मुनि के आश्रम होते हुए सागर में जाकर मिली थी।

मकर संक्रांति से जुड़ी एक और बात कही जाती है वो ये कि इस दिन महाभारत युद्ध में घायल भीष्म पितमाह ने सूर्य के उत्तरायण होने के बाद उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया था।

एक मान्यता ये भी है कि इस दिन देव और दानवों के बीच युद्ध में देवताओं ने दानवों का अंत कर दिया था और हमेशा के लिए अशुभ शक्तियों को खत्म कर दिया था।  

 

मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। जैसे उत्तरप्रदेश में इस त्योहार को खिचड़ी के रूप में मनाते हैं। इस दिन सभी कोई खिचड़ी बनाते भी और उसे दान में भी देते हैं। वहीं असम में इस भोगली बिहू के नाम से मनाया जाता है। वहीं महाराष्ट्र में इस दिन लोग एक दूसरे को तिल और गुड़ के लड्डू बनाकर देते हैं और लड्डू देते समय कहते हैं तिल गुड़ घ्या आणि गोड़ गोड़ बोला यानि तिल और गुड़ का लड्डू खाओ और मीठी बोली बोलो। और गुजरात और राजस्थान में इस उत्तरायण नाम से मनाते हैं। इस दिन सभी अपने परिवार के साथ मिल कर पतंग उड़ाते हैं। पूरा आसमान सिर्फ रंग-बिरंगी पतंगों से छा जाता है। तमिलनाडू में इस दिन को पोंगल के नाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान को अनाज का भोग लगाया जाता है। तो बच्चों इस तरह से हमारे देश में मकर संक्रांति को अपने-अपने तरीके से सभी लोग खुश होकर मनाते भी हैं और खुशियां बाँटते भी हैं।

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