दो मुंह वाली चिड़िया

Short Moral story for kids in hindi

एक बार की बात है ढोलकपुर जंगल में चिंकी और मिनकी नाम की एक चिड़िया रहती थी। अब आप सोचेंगे कि नाम तो दो है फिर एक चिड़िया कैसे। तो बच्चों चिड़ियाँ तो एक ही थी लेकिन उसके दो मुहँ थे। बाई तरफ मुंह वाली का नाम था चिंकी और दाएं तरफ मुहँ वाली का नाम था मिनकी। वैसे तो इनके नाम सिर्फ घर वालों के ही लिए थे, क्योंकि सभी बाहर वाले इन्हें दो मुहँ वाली चिड़ियाँ ही कह कर बुलाते थे। जब चिंकी-मिनकी छोटी थी तब इन दोनों में बहुत प्यार था। एक साथ खाना खाना, एक साथ सोना और एक साथ खेलना और एक साथ मिलकर गाना गाना मैं हूँ चिंकी, मैं हूँ मिनकी, है हम दो, लेकिन हम है एक.. सारा काम दोनों मिलकर ही करती थी। लेकिन जैसे-जैसे चिंकी-मिनकी बड़ी होने लगी दोनों में आपस में लड़ाई होने लगी। जो काम चिंकी करती वो काम मिनकी को अच्छा नहीं लगता।

 

 जो काम मिनकी करती तो वो काम चिंकी को अच्छा नहीं लगता। बस दोनों किसी तरह एक-दूसरे से लड़ने का मौका ढूंढती। बस एक काम चाह कर भी दोनों नहीं कर सकती थी, एक दूसरे से अलग नहीं हो सकती थी। क्योंकि उनके बस मुहँ ही अलग थे लेकिन शरीर एक था। तभी एक दिन चिंकी को बहुत ज़ोर की भूख लगी। उसने मिनकी से कहा चल मिनकी बाहर कुछ खाने के लिए चलते हैं। मुझे बहुत ज़ोर की भूख लगी है। मिनकी चिंकी की बात नहीं मानती और उससे वो कहती है कि मुझे नहीं खाना। अभी मुझे खाने का बिल्कुल भी मन नहीं है। लेकिन चिंकी को बहुत मन कर रहा था खाने का इसलिए वो उड़ने लगती है। अब जब चिंकी उड़ती है तो मिनकी भी उसी के साथ उड़ती है। क्योंकि इन दोनों का शरीर एक था। ये सब देख कर मिनकी को बहुत गुस्सा आता है। वो पूरे रास्ते चिंकी से लड़ती है। तभी अचानक चिंकी को एक पेड़ दिखाई देता है जिसमे बड़े मीठे-मीठे आम लगे होते है। चिंकी उस पेड़ पर जाकर झट से बैठ जाती है और उसके मुंह की तरफ जो आम होता है उसे खाना शुरू करती है। चिंकी को मीठा-मीठा रसीला आम खाते देख मिनकी का भी बहुत मन करता है आम खाने का लेकिन मिनकी के मुहँ की तरफ एक भी आम नहीं होते। तो मिनकी चिंकी से कहती है चिंकी जरा मुझे भी आम खिला ना। देखने से तो बहुत स्वादिष्ट लग रहे हैं। तभी चिंकी कहती है, मैं क्यों खिलाऊँ।  तुमको तो आना नहीं था ना और वैसे भी हम दोनों का पेट तो एक ही है इसलिए इसे मैं ही खाती हूँ। ऐसा कहते हुए चिंकी आम खाना फिर से शुरू करती है और मिनकी बस उसे देख कर ललचाती रह जाती है। इसके बाद आम खत्म होने के बाद दोनों फिर से अपने घर वापस आ जाती हैं। अब अगले दिन मिनकी बाहर जाने को चिंकी से कहती है और चिंकी मना करती है। फिर मिनकी जबरदस्ती उड़ कर चिंकी को भी साथ ले जाती है और मिनकी जाकर एक पेड़ पर बैठ जाती है।

 

चिंकी-मिनकी के लिए ये वाला पेड़ एक दम नया था। इससे पहले वो कभी इस पेड़ पर नहीं आई थी। तभी चिंकी मिनकी से कहती है..मिनकी इस पेड़ पर पहले हम लोग कभी नहीं आए है। पता नहीं कैसे फल होंगे इस पेड़ के। तुमको खाना है तो चलो किसी दूसरे पेड़ पर चलते है। लेकिन मिनकी चिंकी की बात नहीं मानती और पेड़ से फ़्ल लेकर खाना शुरू करती है। तभी दूसरे पेड़ में बैठा कौआ ज़ोर से चिल्लाता है.. मैं हूँ ब्लैकी.. करता हूँ कांव-कांव, करना ना वो काम कभी, जिसके लिए मैं कह दूँ नो-नो। यानी मेरी प्यारी प्यारी चिंकी-मिनकी बिल्कुल ना खाना इस पेड़ का फल..क्योंकि इसमे मिला है जहर। कल की ही बात है आया था चीकू खरगोश खाने ये फल, जैसे ही उसने खाया वो दूर जा गिरा क्योंकि उस फल में मिला था जहर। लेकिन मिनकी ब्लैकी कोए की बात नहीं मानती और फल खाना शुरू कर देती है। फिर जैसे ही वो फल कहती है चिंकी और मिनकी दूर जाकर गिरती और फिर कभी उठ नहीं पाती।

Moral of the story : तो बच्चों इस कहानी से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है, वो ये कि अक्सर हम परिवार में अपनों से लड़ते-झगड़ते रहते है और इस लड़ाई के चक्कर में आपस में ही एक-दूसरे को नुकसान पहुंचते हैं। तो हमें लड़ाई-झगड़े से बचना चाहिए और आपस में मिल कर रहना चाहिए।